February 25, 2024
WhatsApp Group Join Now

काबली चना,राजमा,सरसों, देशी चना, तुअर,मूंग,मसूर,उडद,बाजरा आदि फसलो की तेजी मंदी रिपोर्ट

काबली चना- थोड़ी और तेजी संभव

महाराष्ट्र में पिछले दो दिनों से बरसात चलने से मंडियों में काबली चने की आवक घट गई है। दूसरी ओर मध्य प्रदेश कर्नाटक में मोटे माल की लिवाली निर्यातक करने लगे हैं। यही कारण है कि यहां 300 रुपए बढ़कर महाराष्ट्र का व्यापार 7800/8400 रुपए प्रति क्विंटल तक हो गया है। मोटे माल क्वालिटी अनुसार बिक रहे हैं। नीचे वाले माल भी 200/300 रुपए बढ़ाकर बोलने लगे हैं तथा कुछ और तेजी के आसार बन गए हैं।

राजमा अभी बाजार यहीं टिके रहेंगे

इस बार राजमां चित्रा की बिक्री को गन्ना एवं वरुण माल ठंडा कर दिए हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि इसका उत्पादन महाराष्ट्र में बहुत अधिक हुआ था तथा क्वालिटी बढ़िया होने से अधिकतर पैकिंग निर्माता उन मालों को खरीदकर पैकिंग किए हैं तथा भरपूर लाभ मिल रहा है। इसको रेस्टोरेंट्स एवं ढाबे वाले पहले खरीद रहे हैं, क्योंकि क्वालिटी बहुत बढ़िया है तथा बनाने में के बाद अच्छा गल रहा है। दूसरी ओर पुणे सतारा वाई लाइन के हल्के माल भी काफी उतर रहे हैं, यही कारण है कि ब्राजील, चाइना एवं इथोपिया के पड़ते ऊंचे के बावजूद भी बेपड़ते में यहां व्यापार हो रहा है तथा कुछ दिन बाजार यहीं टिके रहने की संभावना है।

मोठ- घटने की गुंजाइश नहीं

मोठ में चालू सप्ताह के अंतराल 100/150 रुपए प्रति क्विंटल की तेजी आ गई है। गौरतलब है कि राजस्थान की मंडियां तेज रहने से वहां से लोडिंग दिल्ली सहित यूपी, हरियाणा, पंजाब के लिए कम हो रही है तथा ट्रक भाड़े महंगे हो जाने से राजस्थान से सीधे पंजाब के लिए लोडिंग चल रही है। यही कारण है कि बाजार अभी आगे और तेज लग रहा है। मूंग में तेजी से भी इसमें और तेजी आ गई है।

देसी चना सीजन पर भी मंदा नहीं होगा

देसी चने की बिजाई इस बार राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश एवं कर्नाटक उक्त पांचों राज्यों में बहुत कम हुई है, क्योंकि किसानों का रुझान काबली चना एवं मसूर की बिजाई पर अधिक लगा था, इन परिस्थितियों में मार्च बीतने वाला है, मध्य प्रदेश के किसी मंडी में आवक का प्रेशर नहीं है। महाराष्ट्र में देसी चना आकर निबट चुका है, जो चांपा माल दिल्ली में 5300 रुपए बिका था, उसके भाव 5800 रुपए बोलने लगे। राजस्थानी चना भी 5300/5325 रुपए प्रति क्विंटल हो गए हैं तथा आगे सीजन पर भी मंदा नहीं लग हा है। वर्तमान भाव का चना लाभ दे जाएगा।

तुवर बाजार अभी और तेज होगा

महाराष्ट्र में बरसात होने से वहां नई पुरानी तुवर की आवक काफी घट गई है। यूपी, बिहार, झारखंड में गर्मी वाली तुवर में कोई विशेष दम नहीं है, किसानों को अपनी खपत हेतु ही 2 महीने के लिए होना मुश्किल लग रहा है, क्योंकि सभी क्षेत्रों में तुवर की बिजाई बहुत ही कम हुई है। दूसरी ओर रंगून में फसल बढ़िया है, लेकिन प्रति हेक्टेयर उत्पादकता इस बार कम बताई जा रही है। पुराना माल वहां की मंडियों में नहीं होने से नए माल के भाव कारोबारी बढ़ाकर बोल रहे हैं। यही कारण है कि चेन्नई वाले भी अप्रैल एवं मई के सौदे काफी ऊंचे बेच दिया है। हाजिर में माल की कमी है, जिससे यहां भी 100 रुपए बढ़कर 8200/8225 रुपए लेमन का व्यापार हो गया है तथा आगे अभी और तेजी लग रही

मूंग- रुक-रुककर अच्छी तेजी

मध्यप्रदेश की पुरानी मूंग 7300 से 7600 रुपए प्रति क्विंटल के बीच बिक रही है तथा वह माल भी ज्यादा नहीं मिल पा रहा है। जो धोया बनाने के काम ही मिलो में आ रहा है। इधर राजस्थान के खाटू लाइन की बढ़िया 8500 रुपए प्रति क्विंटल बिक गई हैं, क्योंकि वहां की लोकल दाल मिलें ही माल खरीद रही है। एवरेज माल 8000 रुपए तक बोलने लगे हैं। राजस्थान के अलावा 2 महीने के अंतराल कोई दूसरी मूंग आने वाली नहीं है। उधर मध्यप्रदेश के होशंगाबाद, खरगोन लाइन की मूग भी इस बार लेट आने वाली है। यूपी की जून में आएगी, इन सारी परिस्थितियों को देखते हुए 500 रुपए अगले कुछ दिनों के अंतराल
बढ़ जाएंगे

मसूर अभी मंदे के आसार

मसूर की नई फसल एमपी राजस्थान एवं मध्य प्रदेश में आ चुकी है, लेकिन वहां की मंडियों में आवक नहीं बढ़ पा रही है तथा विदेशों के माल पड़ते में नहीं मिल रहे हैं । अभी हाल ही में कनाडा में 20-25 डॉलर प्रति टन बढ़ाकर हाजिर शिपमेंट के भाव बोलने लगे, जिसके चलते दाल मिलों की बिल्टी वाले देशी माल में लिवाली बढ़ गई है। विदेशी माल में भी कुछ नई स्टॉकिस्ट लिवाली करने लगे हैं, इन सारी परिस्थितियों को देखते हुए बाजार में यहां से और तेजी लग रही है। जो मसूर बिल्टी में 6000 रुपए बिकी थी, उसके भाव 6125 रुपए बोलने लगे हैं। कनाडा से माल भी 6000 रुपए हो गए हैं। अत: वर्तमान भाव में व्यापार करना चाहिए।

उड़द- व्यापार में भरपूर लाभ होगा

रंगून में उड़द के भाव 35-40 डॉलर प्रति टीन 2 दिनों के अंतराल बढ़ गए हैं, जिससे चेन्नई वाले 200 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाकर हाजिर लोडिंग का व्यापार करने लगे हैं। सटोरिए मार्च का उड़द और तेज बोलने लगे हैं तथा अप्रैल का उससे भी बढ़ा कर बोल रहे हैं। यही कारण है कि हाजिर में माल की भारी कमी हो जाने एवं विकवाल पीछे हट जाने से 100 रुपए बढ़कर 8300 रुपए प्रति क्विंटल का एसक्यू का व्यापार यहां हो गया। एफ ए क्यू के भाव भी 7600 रुपए को पार कर गए हैं तथा आगे 300/400 रुपए जल्दी बढ़ जाने की धारणा बन गई है।

चीनी और मंदा नहीं

ग्राहकी निकालने एवं मिलो की बिकवाली घटने के कारण मील डिलीवरी चीनी के भाव 10/15 रुपए घटकर 3400/3545 तथा हाजिर के भाव 3700/3825 रूपए प्रति कुंटल बोले गए। मुंबई में भी मांग बढने से चीनी हाजिर के भाव 3342 / 3602 रुपए प्रति कुंटल पर टिके रहे।सप्लाई व मांग को देखते हुए आने वाले दिनों में इसमें ज्यादा तेजी की संभावना नहीं है। बाजार सीमित उतार-चढ़ाव बीच घूमता रह सकता है ।

चावल – अभी कुछ दिन तेजी नहीं

यद्यपि हरियाणा, पंजाब, यूपी, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं राजस्थान की मंडियों में धान का ज्यादा प्रेशर नहीं है तथा राइस मिलों में तैयार चावल का स्टॉक भी ज्यादा नहीं है, इन सब के बावजूद निर्यातकों की मांग ठंडी पड़ जाने तथा डोमेस्टिक मार्केट में ग्राहक नहीं होने से चावल में तीन-चार दिनों से मंदे का रुख बना हुआ है तथा अभी मार्च क्लोजिंग एवं अप्रैल में शादियों की खपत नहीं के बराबर रह जाने से तेजी के आसार दिखाई नहीं दे रहे हैं। वर्तमान में जो 1718 प्रजाति के चावल सेला का व्यापार 7800 रुपए प्रति क्विंटल में हो रहा है, इसमें 200 रुपए और घटने के बाद ठहर जाएंगे।

मक्की – अभी और बढ़ेग

मक्की की आपूर्ति मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान की मंडियों में पूरी तरह समाप्त हो गई है। स्टॉक के माल जो पड़े थे, वह भी सीधे खपत वाली मंडियों में चला गया है, जिससे बाजार वहां की मंडियों में 50/60 रुपए प्रति क्विंटल और बढ़ाकर बोलने लगे हैं। इधर बिहार के पुराने मालों के पड़ते नहीं है । यही कारण है कि एमपी राजस्थान की मक्की पानीपत, सफीदों, राजपुरा, चीका पहुंच में 2450 रुपए प्रति क्विंटल बिक रही है। पंजाब पहुंच में भी 2460 रुपए तक व्यापार हुआ है तथा अभी कुछ दिन बिहार की मक्की नहीं आने की स्थिति में 40 / 50 रुपए और बढ़ जाएगी।

गेहूं- अब यहां से फिर घटने के आसार

हम मानते हैं कि सरकार द्वारा खुले बाजार में बिक्री हेतु जो गेहूं का टेंडर दिया जा रहा है, वह ऊंचा जा रहा है तथा ट्रक भाड़े से लेकर एफसीआई के गोदामों से गेहूं के पड़ते ऊंचे लग रहे हैं, इन सब के बावजूद जो वर्तमान में 2500 / 2510 रुपए प्रति क्विंटल का गेहूं बिक रहा है, इसमें अब बढ़ने की बिल्कुल गुंजाइश नहीं है तथा इसमें जल्दी 50 रुपए प्रति क्विंटल का मंदा लग रहा है । इसका एक और कारण यह है कि गर्मी बढ़ रहा है तथा गेहूं की आवक उत्तर भारत में 10-15 दिन बाद शुरू हो जाएगी। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ में नया गेहूं आकर 2150 / 2250 रुपए लूज में बिक रहा है।

बाजरा व्यापार भरपूर लाभ देगा

बाजरे की आपूर्ति यूपी, राजस्थान एवं हरियाणा की मंडियों में पूरी तरह समाप्त हो गई है, गोदामों में स्टॉक के पड़े माल कारोबारी बढ़ाकर बोलने लगे हैं। वास्तविकता यह है कि डिस्टलरी प्लांटों में बाजरे के पड़ते प्रोसेसिंग के लिए लग रहे हैं, जिससे यूपी, राजस्थान का बाजरा हाल ही में 100 रुपए बढ़कर 2300 रुपए मौली बरवाला पहुंच में बिक गया है। यहां भी 2280 रुपए गोदाम से उठू भाव बोलने लगे हैं। बाजरे की नई फसल कोई निकट में आने वाली नहीं है, इसे देखते हुए बाजरा अभी 100 रुपए प्रति क्विंटल और तेज लग रहा है।

सोयाबीन: सीमित तेजी-मंदी

घटी हुई कीमत पर भी सोयाबीन की बिक्री सुस्त ही बनी हुई है। यही वजह है कि जलगांव में सोयाबीन 50 रुपए और मंदा होकर 5100 रुपए प्रति क्विंटल के स्तर पर आ गया । एक दिन पूर्व भी इसमें इतनी ही मंदी आई थी। निवेशकों की लिवाली कमजोर ही बनी होने से शिकागो के सक्रिय तिमाही सोया तेल वायदा में 27 सैंट प्रति पौंड की मंदी आने की जानकारी मिली। केएलसीई के सक्रिय तिमाही पाम तेल वायदा में साप्ताहिक अवकाश रहा लेकिन बीते दिन इसमें 12 रिंगिट प्रति टन की मंदी आई थी। आगामी एक-दो दिनों में हाजिर में सोयाबीन की तेजी-मंदी सीमित दायरे में ही बना रहने के आसार हैं।

बिनौला तेल – रुका रहेगा

आपूर्ति कमजोर होने तथा वनस्पति घी निर्माताओ की मांग से बिनौला तेल के भाव 50 रुपए बढ़कर 9550 रुपए प्रति कुंतल हो गए। पंजाब की मंडियों में बिनोले के भाव 3200/3400 रूपए प्रति कुंतल बोलें गए। हाल ही में आई गिरावट आपूर्ति व मांग को देखते हुए इसमें ज्यादा घट-बढ़ की संभावना नहीं है। बाजार सीमित दायरे में घूमता रहेगा

सीपीओ सीमित घट-बढ़

विदेशों में सीपीओ के भाव 1025 डॉलर प्रति टन बोले जाने तथा वनस्पति घी निर्माताओं की मांग निकलने एवं आयातकों की बिकवाली घटने से कांदला में क्रूड पाम ऑयल के भाव 50 रुपए बढ़कर 8300 रूपए प्रति क्विंटल हो गए। स्टॉक व मांग को देखते हुए आने वाले दिनों में तेजी की संभावना नहीं है। बाजार सीमित उत्तार चढ़ाव के बीच में घूमता रहेगा।

सरसों खल- तेजी नहीं

पशु आहार वालों की मांग सुधारने तथा आपूर्ति घटने से सरसों खल के भाव 50 रूपए बढ़कर 2300/2575 रूपए प्रति कुंतल हो गए बिकवाली घटने से उत्तर प्रदेश के मंडी में सरसों खल की कीमतों में तेजी का रुख रहा हाल ही में सरसों के भाव ऊ परी स्तर से नीचे आ गए आने वाले दिनों में आपूर्ति बढ़ने की संभावना को देखते हुए इसमें तेजी की उम्मीद नहीं है बाजार सीमित दायरे में घूमता रह सकती है

सरसों तेजी नहीं

मौसम खराब होने के कारण आवक कमजोर होने तथा मिलो की मांग से लारेंस रोड पर सरसों के भाव 5450/5500 रुपए प्रति कुंतल पर मजबूत रहे । नजफगढ़ मंडी में लूज में इसके भाव 4900/5000 रुपए प्रति कुंतल बोले गए उठाव ना होने से जयपुर में 42 प्रतिशत कंडीशन सरसों के भाव 50 रूपए घटकर 5650/5675 रुपए प्रति कुंटल रह गए। देश की मंडियों में सरसों की आवक 11.25 लाख बोरी की रही। आवक का दबाव बढने की संभावना को देखते हुए इसमें तेजी के आसार नहीं लग रहे हैं

राइसब्रान आयल मंदे के आसार कम

रिफाइंड वालों की मांग निकलने तथा बिकवाली कमजोर होने से राइसब्रान ऑयल पंजाब के भाव 7750 रूपए प्रति कुंतल पर टिके रहे। हालाकि विदेशों के मजबूत समाचार आने के कारण विदेशी तेलों में तेजी का रुख रहा। हाल ही में आई गिरावट को देखते हुए आने वाले दिनों में इसमें और ज्यादा मंदि की संभावना नहीं है बाजार वर्तमान भाव के आसपास रह सकता है।

देसी घी-अभी बाजार सुस्त ही रहेगा

उत्तर भारत के प्लांटों में लिक्विड दूध के भाव सस्ता होने से पहले की अपेक्षा देसी घी के उत्पादन में पड़ता लग रहा है तथ मक्खन भी पहले की अपेक्षा सस्ता बन रहा है। यही कारण है कि पिछले दिनों कंपनियों ने 150 रुपए प्रति टीन देसी घी के भाव घटा दिए। टेट्रा पैक में भी 10 रुपए की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा मक्खन के भाव भी 10 रुपए घटकर 400/410 रुपए फैट्स के हिसाब से रह गए। अभी कुछ दिन तेजी की गुंजाइश नहीं है, क्योंकि प्रीमियम क्वालिटी का व्यापार 7800/8000 रुपए प्रति टीन के बीच होने लगा है, जबकि हल्के माल 6700/6800 रुपए बिक रहे हैं, इन परिस्थितियों में बाजार अभी सुस्त ही रहेगा।

नॉट व्यापार अपने विवेक अनुसार करे हम किसी भी प्रकार की लाभ हानि की जिमेवारी नही लेते हैं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!